शाश्वत यौगिक खेती एवं सम्पूर्ण ग्राम विकास का आधार – आध्यत्मिकता

सुनंदा दीदी, नॅशनल कोआर्डिनेटर, ग्रामविकास विंग। सुनंदा दीदी कई सालो से शाश्वत यौगिक खेती के कार्यक्रम करते है। ब्रह्माकुमारी सुनंदा दीदीजीने ब्रह्माकुमारी संस्था का परिचय दिया की इस संस्था को 84 साल हुए है। इस संस्था का उद्देश बताया की यह संस्था मनुष्य आत्माओं को निगेटिव्ह से पाॅजिटिव्ह, प्युअर, पीसफूल बनाती है। इसमें पहला मुख्य सब्जेक्ट सच्चा ईश्वरीय ज्ञान। इसमें मै कौन हू, मुझे कौनसा कर्म करना जिसमें लाभ हो ना की नुकसान हो। भगवान का सत्य परिचय दिया जाता है। सृष्टी चक्र, दुसरा राजयोग पढाया जाता माना राजाई प्राप्त करानेवाला योग। योग के व्दारा स्वभाव और कर्मो में पाॅजिटिव्हीटी लाता है। तिसरा धारणा, क्षमा, प्रेम, दया इसकी धारणा होती है। चवथा सेवा माना सुख देना, सहयोग देना इसमें तन-मन-धन की सेवा सिखाई जाती है। यहा सिखाया जाता आत्म ज्योत से अपनी और दुसरो की जगानाा इस संस्था पाच पिस प्राइज मिले है। युनो में गैरसरकारी संस्था के रुप में कार्य कर रही है। इसमें 19 विंग है। ग्रामविकास विंग के अंतर्गत गांवो की सेवा करते है। कुछ गांव एडाॅप्ट करते है और सरपंच, पोलीस पाटील वहा के युवा को सम्मिलीत करते हुए काम करते है। दुसरा इसमें व्यसनमुक्ती के कार्यक्रम करते है। इसमें तिसरा शाश्वत यौगिक खेती इसमें चार प्रकार के फायदे होते है। सबसे पहले उनके कर्म श्रेष्ठ कर्म होते है चरित्रवान बनाता है। जमीन उपजाऊ बनती है। और फसल बहुत अच्छी जो बहुत दिनो तक रहती है। इससे पैसा भी ज्यादा मिलता है। चवथा संबध सुधरते है। किसान माना हम समझते है देश की शान है। उनको हम इस विंग के व्दारा शान में बिठाते है। यहा पर कोई भी आ सकता है। धर्म भेद, जाती भेद नही है। क्योंकी इसकी स्थापना स्वयं भगवान ने की है। जब दुनिया में धर्म ग्लानी का समय गीता में वर्णीत यदा यदा ही धर्मस्य ……. के समय अनुसार उनकी जरुरत पूरी दुनिया को पडी तो वह 1937 में अवतरीत होकर इस संस्था की स्थापना की।
ब्रह्माकुमार भ्राता राजेश दवे जी, उपमहाप्रबंधक, नाबार्ड ने कहा यह सही बात है की हम ऐसे समय पर खडे है जहा जीवनशैली परिवर्तीत हो रही है। हम यब को मिल कर ऐसा कर्तव्य करना जिससे विश्व की गरीमा फिर से स्थापित कर सके। अभी भी हमारी 55-60ः भाई-बहने गावों में रहते है। गावो के लोगों के प्रती कैसे संवेदनशील बने कैसे योगदान दे। योग का दान देना जरुरी है। पहले अपने आप को श्रेष्ठ समझे। भारत मेरा देश है। भारत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ देश है। जीवन एक यात्रा है। अभी सारा विश्व सोच रहा है अभी कौन आगेे आयेंगा तो जो देश अपना हाथ, हेड और अध्यात्मिकता(दिल) उपयोग में लाएंगे वह आगे जाएंगे और वह भारत ही होगा। सायन्स और टेक्नाॅलाॅजी के साथ मिसिंग लिंक है तो वह हैै अध्यात्म की लिंक। वह पूरी कर रही है ब्रह्माकुमारीज। प्रकृती और मानव इन दोनों का बहुत अच्छा संबंध है। सुक्ष्म जीवाणू हमारी बहुत मदत करते है। धरती माता सुखी तब है जब सुक्ष्म जीवाणू बहुत ज्यादा होते है। गाय के गोबर में सबसे ज्यादा सुक्ष्म जीवाणू है। अमूल कहता है अमूल टेस्ट आॅफ इंडिया है पर भारत टेस्ट आॅफ वल्र्ड है। अमेरिका में चले जाओ भारत के बैंगन का टेस्ट वहा नही मिलता। भारत के नॅशनल फ्लॅग में तीन कलर है। ग्रीन कलर ग्रीन रिव्हाल्युशन का प्रतीक है। व्हाइट कलर श्वेत क्रांती का प्रतीक है और आॅरेंज कलर अध्यात्मिकता से सच्ची दिशा और सच्चा परिवर्तन का प्रतीक है। अभी तक हम प्रकृती का दोहन और शोषन करते रहे। हमारे सोच से प्रकंपन फैलते है उसका पेड और पौधो पर असर होता है। उसके लिए खेती में सुक्ष्म वातावरण बनाना जरुरी है। योग के माध्यम से परिवर्तन कर सकते है। उन्होंने शाश्वत यौगिक खेती का कन्सेप्ट बताया कि जीयो और जीने दो। ग्रामविकास में अध्यात्मिकता की जरुरत है। कृषी में हमें सभी जीवो को शांती के सुख के शक्ती देना। आध्यात्मिकता से हम जमीन को सस्टेनेबल माना शाश्वत बनाता है। 18 एलिमेंट जो धरती को उबजाऊ बनाते है। जो की मिसींग है, जो सुक्ष्म है उनको जमीन को देना है। आज गाव में राजनेता है पर नैतिकता है यह मिसिंग लिंक है। गाव में स्कुल है पर चरित्र की मिसिंग लिंक है तो उस मिसिंग लिंक को पूर्ण करना है। यह समय हैै परिवर्तन का हमे अपनी उंगली लगाना हैै गोवर्धन पर्वत रुपी इस व्यवस्था में, यह सृष्टी यह देश को सहयोग देना है। आधुनिकता के साथ अध्यात्मिकता को जोडना है। धन के साथ अध्यात्मिकता को जोडना है। ब्रह्माकुमारीज संस्था इस कार्य में अहम भुमिका निभाएंगी और भारत को टाॅप बनाएंगी। हम प्रकृती को शंाती प्रदान करेंगे तो प्रकृती भी हमें शांती देंगी। सायंन्स के साथ सायलेन्स पाॅवर को अपनाए।
ब्रह्माकुमार राजयोगी भ्राता राजूभाई उपाध्यक्ष ग्रामविकास प्रगाग जी ने कहा की भारत के किसान को अन्नदाता कहते है। उनके मेहनत के कारण हम जी रहे है। वह किसान हमारे लिए दिन रात मेहनत कर रहा है। लेकिन न्युज पेपर में देखे तो पता चलता है की किसान आत्महत्या कर रहा है। और विदर्भ में इसका प्रमाण ज्यादा है। इसके लिए कई प्रकार की योजनाए बनाई गयी है। यौगिक खेती महाराष्ट्र की देन है। एक भाई ने यह यौगिक खेती चालू की थी पर तब मुझे इसके बारे में कुछ भी नही पता था वह मुझे उनके खेत पर लेकर गए और वहा देखा तो बहुत अच्छे पेड थे खेती लहरा रही थी गोमुत्र और गोबर का खत देते है और उसके साथ परमात्मा से शक्तिया लेकर पौधो को दान देते है। ऐसेही 2-3 बार वहा जाना हुआ और इस प्रोजेक्ट का निर्माण हुआ। जैसा ‘अन्न वैसा मन’ ऐसा कहते है। इस खेती में रसायण का और केमिकल का उपयोग नही होता। पहले तो गुजरात में एस. डी. एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी धातेवाडा में इसका सायंटिफिक रिसर्च हुआ और पाच साल रिसर्च किया गया। और बाद में गुजरात के चारो युनिवर्सिटी में रिसर्च किया गया और सफल रहा। महाराष्ट्र की युनिवर्सिटीज में भी रिसर्च हुयी।
सारे रोगो की जड है खाद्य पदार्थ, पंजाब में अनाज उगता है पर वह बाहर से बुलाते है पर वह वह बाहर से बुलाते है। पर आबादी भी दिनोदिन बढ रही है। सरकार व्दारायोजनाए बन रही है की किसानो की आमदनी दुगुनी हो जाए। जगन्नाथ पूरी के मिटींग में कमिश्नर ने बताया था की 2000 रु. हर किसानो को मिला पर उस दिन शराब की बिक्री दोगुनी हुर्यी वह पैसा शराब पिने में चला गया। किसान को पैसा आया पर चिंतन और चरित्र को परिवर्तन नही किया। ब्रह्माकुमारीज संस्था मुख्य उद्देश यह है की हमारे विचारधारा को परिवर्तन कर चिंतन और चरित्र निर्माण करना। विचारों के आधार से हमारे चारो और एक सकारात्मक आभा मंडल तैयार होता है। इसका प्रयोग कर सकते हैै। घर में भी गमलो में पौधे लगाओ और उनसे बाते करो रोज और कुछ दिन मत जाओ तो सुख जाएंगे तो सुख जाएंगे। तो पौधे भी राह देखते है मालिक का। तो मै आत्मा इस शरीर का मालिक हु। किसान भाई बहुत खुशी से बताते है जहा हम योग करते हैै जहा हम योग में चक्कर लगाते है वहा ओले भी गिरते तो भी हमारे खेतो में कोई नुकसान नही होता। जैसा अन्न वैसा मन तो झगडों का कारण बिमारीयों का कारण यह अन्न है। 12000 पेशंट के पिछे 1 डाॅक्टर है। तो बिमारीया भी बहुत बढ रही है। परमात्म शक्ति का उपयोग कर खेती करना है इसके कई गुणा अच्छे परिणाम आएंगे। किसी भी प्राॅब्लम का निवारण प्रकृती में ही है बस हमे उसको अच्छे से युज करना है। हम किसी भी प्रकार का रसायण का युज नही कर रहे है। सिर्फ पशु धन गोबर का युज करना है और उनपर योग का प्रयोग करना है। यह योग आपको 7 दिन के कोर्स में पूरी तरह से सिखाया जाएंगा। संसार के सभी समस्याओं का निवारण इस योग मे है। मन के प्राॅब्लम भी इस योग में खत्म हो जाएंगे।
बहन भाग्यश्री बानायत, संचालक रेशिम संचालनालय, महाराष्ट्र ने कहा की रेशिम खेती में भी केमिकल वा रसायण का यूज नही होता है। शाश्वत यौगिक खेती में किसी केमीकल का युज नही होतो तो जमीन को भी नुकसान नही होता. यह खेती डबल उत्पन्न का वादा करती है। उन्होने ब्रह्माकुमारीज संस्था की सराहना की वह किसानो के लिए आगे आए। हमारे पुरातन काल से ही यौगिक खेती का प्रयोग होता था पर भूल गए थे ब्रह्माकुमारीज ने इसे फिरसे दुनिया के सामने लाया है। बहन रश्मि बर्वे जिल्हा परिषद अध्यक्ष जीने कहा की आज किसान आत्महत्या कर रहा है और यौगिक खेती से समस्या समाप्त हो जाएंगी इसके लिए ब्रह्माकुमारीज का अभिनंदन किया।
भ्राता रविंद्र भोसले, जाॅइन्ट डायरेक्टर, कृषी विभाग, नागपूर जी ने कहा की कोई भी कृषी तकनीक और ज्ञान किसानो को देना है तो उसे कृषी विद्यालय में प्रमाणित होना चाहिए। जनसंख्या बढी और हरित क्रांती हुई पर उसमे खत और रसायन का युज किया गया हमारे संकल्प खराब हुए। आज हर एक आदमी कहता है पर्यावरण की हानी हो रही है। पर मुझे कोई पुछेंगा की यौगिक खेती से फायदा होगा तो मै कहूॅंगा की हाॅं. प्रकृती से जुडना पडेंगा उसमें जैविक खेती करना पडेगा। और बिमारीयो को खत्म करने के लिए यौगिक खेती का युज किया जाना चाहिए। परमपरागत खेती में हमे यौगिक खेती और जैविक खेती को लाना पडे़गा। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार का किसानो के लिए एक प्रोजेक्ट चल रहा है जिसका नाम है स्मार्ट(स्टेट आॅफ महाराष्ट्र आर्ट एन्ड रुरल ट्रेनिंग प्रोग्राम उसके साथ यौगिक खेती को जोड दिया जाए तो सबको उससे लाभ होगा। उन्होंने महासम्मेलन को धन्यवाद दिया।
भ्राता टेकचंद सावरकरजी जी ने कहा की यह बात है की किसान अभी भटक गया है। उन्होनें कहा पुराने लोगो ने खेती की और सुखी थे गाय रहती थी गोबर डालता था। अभी हम पानी डालने के बाद पाव अंदर नही जाता क्योकी रसायण का युज किया। टमाटर किसान बेचने जाता तो पेस्टीसाइड फवारनी करके जाते क्योंकी पैसा निकालना है। आज हम फल खाने में भी हिचकिचा रहे है। हमारे खेत में नाला था अभि नाली बना डाली. बारीश आती तो बाढ आ जाती है। अभी विदेशो में जाकर बेचने जाओ तो कोई लेता नही इसके कारण अभी किसानो की जान गले तक आ गयी। अभी हमें यौगिक खेती के बगैर कोई मार्ग नही। सबको शुभेच्छा दी। हमारे देश का नाम पूरे पूरी दुनिया में होगा।
ब्रह्माकुमारी राजयोगीनी सरला दीदी ने कहा भारत में किसान भाईयो को बहुत परेशानीया हो रही है। परेशानीयों को दूर करने के लिए पहले स्वयं को जानना होगा और उस सर्वोच्च सत्ता से जुडना पड़ेगा। संतुलित मन हमेशा श्रेष्ठ कर्म करता है। वह शुध्द मन ही सब चेंज कर देगा। इस विद्यालय में यही बताया जाता है की स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन होगा। रोज आधा घंटा अपने लिए, समाज के लिए, देश के लिए आधा घंटा देना होगा। एक दिप से दिपमाला बनती है। किसानो की आत्महत्या हम रोक सकेंगे। परमात्मा पिता से शक्तियों से भरपूर होते रहिये।
भ्राता बाळासाहेब रुग्वे जी प्रथम यौगिक खेती करनेवालो में ने कहा की मै 18 साल पहले सायंन्स का विद्यार्थी था। मेरे पास 11 एकर खेती थी और उसमें से आधा एकर जमीन ब्रह्माकुमारीज को प्रयोग करने के लिए दिया। और कुछ समय बाद मैने कमाल देखी लहराती हुई। सबसे पहले हमारी धरती माॅं को हमें परमात्मा की याद में शांती के वायब्रेशन देते है। आइस्टाईन ने कहा तो अध्यात्म और विज्ञान को मिलाना पडे़गा। एक साइंटिस्ट ने कहा की ब्रह्मांड की एनर्जी को युज करो। बीज को योग के वायब्रेशन देकर टेस्ट किया तो पाया गया की वायब्रेशन दि गए बीज के जर्मिनेशन पाॅवर 94ः पाया गया और नाॅर्मल सीड में 86ःपाया गया। अनाज के क्वाॅलिटी को बढाना हो तो यौगिक खेती करनी पडेगी।

श्री सुनिल बाबू केदार जी पशुपालन तथा क्रिडा विभाग कॅबीनेट मंत्रीने कहा की मै 25 साल से इस संस्था से जुडा हूॅ। मै सम्मिलित रहता हूॅ। इय संस्था व्दारा अनोखे प्रोग्राम चलाए जाते है। जो इंसान के जिंदगी में सुधार लाने के लिए बहुत जरुरी है। मै मानता हू की सब कार्यक्रम लोगो के हित के लिए करते है। मै किसान होने के नाते मै इस संस्था का शुक्रगुजार हॅू कि संस्था लोगो के सामने प्रक्टिकल योजना बता रही है। इस संस्था के कार्यक्रम अपने मुकाम तक पहूचते है। आज लोगो को जरुरत है यौगिक खेती की। उनको परमात्मा का स्मृती चिन्ह फोटो भेट दिया गया। किसान की समस्याओमें सरकार की योजनाओ मे यौगिक खेती के बारे में सोचा जाएगा। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज को आव्हान किया की महिलाओं की उत्थान के लिए कार्यक्रम आयोजीत करे।
भ्राता मुनिष शर्मा जी डायरेक्टर साॅईल कन्जरवेशन आॅफ इंडिया ने कहा की ब्रह्माकुमारीज का बहुत ही सराहनिय कार्य हुआ है। जो किसान हाशीये पर चले गए थे उनके तरफ ध्यान दिलाया। सिक्किम पूरी तरफ आॅरगनिक है। उन्होने खुद के डिपार्टमेट के कार्याे मे ब्रह्माकुमारीज को आमंत्रित किया। डाॅ. उन्होने कहा की खेती भगवान के हिसाब से होनी चाहिए। ब्रह्माकुमारीज से मेरा पुराना संबंध रहा है। उन्होंने मेडिटेशन की तरफ सबका ध्यान खिचवाया। मेडिटेशन के लिए उन्होंने सुबह का टाइम अच्छा बताया।
राजयोगीनी ब्रह्माकुमारी रुक्मिनी दीदी ने कहा की हमारा मनोबल कमजोर हो गया है उसके कारण प्रकृती पर भी इसका असर होता है। और उन्होंने राजयोग करवाया। सबको शांती का अनुभव हुआ। राजयोगी ब्रह्माकुमार प्रेमप्रकाश भाई जी ने आभार प्रदर्शन किया। मंच का संचालन ब्रह्माकुमारी शोभा बहेनजी ने किया और सभी उपस्थिती भाई-बहनो को ब्रह्मा-भोजन करा कर बिदाई दी।

yogic Kheti

महासम्मेलन शाश्वत यौगिक खेती एव सम्पूर्ण ग्राम विकास का आधार आध्यात्मिकता

Vishwa Shanti Sarovar Vardhapan Day

कार्यक्रम की शुरुवात दिप प्रज्वलन के साथ हुयी। कार्यक्रम के शुरूआत में धरमपेठ निवासी कुमारी सत्यम शिवम सुंदरम गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया । ईशु दादी जी के स्वागत अवसर पर नागपुर के इंडीया बुक में नामधारी जादूगर भ्राता प्रशांत भावसार ने जादू के सुंदर प्रयोग प्रस्तुत कर सभी को मनमोहित कर दिया। विश्व शांति सरोवर की संचालिका राजयोगिनी रजनी दीदी ने प्रथम वर्धापन दिन की खुशी जाहिर करते हुए कहा की पिछले साल जानकी दादी जी ने इस भवन का उदघाटन किया। भगवान शिव का यह बच्चा विश्व शांति सरोवर एक साल का हो गया है। यह सरोवर दादीयों की दुआओं से पल्लवीत होता जा रहा है। दिवंगत पुष्पा राणी दीदी की आशाए पूर्ण हो रही है। पवनसुत हनुमान की तरह सूर्य के पास आसमान में उडान भर रहा है। उन्होंने ईशु दादी की शान में कहा कि ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना से दादी यज्ञ की भंडारी का काम बखूबी निभा रही है। उम्र के 94 वे साल में भी दादीजी यज्ञ का कार्य ईमानदारी व जिम्मेदारी से कर रही है। वे सदा इस बात का प्रयास करती हैं कि यज्ञ का एक पैसा भी व्यर्थ न जाएं बल्कि वह सेवा में ही लगे। दादी नवरात्री की नऊ देवियो में धनलक्ष्मी है। वे सदा मौन में ही रहती है और बहनों की उन्नति एवं सेंटर की उन्नति का वे सदैव ध्यान रखती है। वह सहनशक्ती और गंभीरता की मुर्ती है। दादी बडों की आज्ञाकारी और एकाॅनाॅमी की मुर्त संज्ञा दी। ईशु दादी ने अपने आर्शीवचन में विश्व शांति सरोवर के निर्माणकार्य की प्रशंसा की और कहा कि ब्रहमा बाबा और मातेश्वरी जगदंबा मां के साथ बिताये संस्मरणों को सभी के साथ सांझा किया। आत्मप्रकाश भाई ने सभी को गहन योग अनुभूती का अनुभव कराया ।
प्रथम नागरिक महापौर श्रीमती नंदा जिचकारजी ने कहा मुझे ब्रह्माकुमारी आश्रम में आने पर शांती मिलती है और सब थकान दूर हो जाती है। उन्होंने विश्व शांती सरोवर को शुभकामना देते हुए कहा की यह स्थान दुनिया में नाम कमाएंगा। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज व्दारा दिये गए सम्मान के लिए धन्यवाद दिया और सभी उपस्थितीयों को शुभकामनाए दी। प्रेमप्रकाशभाई को जन्मदिन की बधाई दी और कहां कि, आप बुलाते रहिए मै आती रहूॅंगी।
डीसीपी भ्राता गजानन राजमाने जी ने कहा की पुलिस डिपार्टमेंट में क्राइम की ही बात होती है पर जब से मै ब्रह्माकुमारीज में आ रहा हूॅ मै ऑफिस को मंदीर मानता हूॅं जो भी ऑफिस में आता है उसकी मदत करता हूॅं। उन्होंने विश्वशांती सरोवर के लिए शुभकामनायें व्यक्त करते हुये कहां कि,यहा दूर दूर से लोग आकर भगवान का परिचय प्राप्त करेंगे। उन्होंने ब्रह्माकुमार प्रेमप्रकाश भाई को जन्मदिन की शुभकामनाए दी।
प्रेमभाई ने अपने 70 वे जन्मदिन के उपलक्ष्य में सभी को अपने अलौकिक जीवन यात्रा से परिचीत कराया, वे कैसे ब्रह्माकुमारीज के सम्पर्क मे आये और कैसे आध्यात्मिक जगत में उन्नती की तथा विदर्भ की पुर्व संचालिका दिवंगत पुष्पारानी दीदी जी के साथ सेवा गांव गांव जाकर की। उन्होने येशू दादी और सभी भाई-बहेनो का धन्यवाद किया। प्रेमप्रकाश भाई को एम.एस.सी के टिचर भ्राता निंबालकर सर ने प्रेमप्रकाश भाई को 100 साल जीने का आशिर्वाद दिया।
माऊंट आबु से पधारे ब्रह्माकुमार भ्राता देवकुमार भाई ने कहा कि नागपुर का विश्व शांती सरोवर बहुत भाग्यशाली है क्योकी भूमी पूजन रतनमोहिनी दादी ने किया और उद्घाटन जानकी दादी ने किया और प्रथम वर्धापन दिन येशू दादी के व्दारा हुआ यह इस भुमी का भाग्य है। साथ में उन्होंने प्रेमप्रकाश भाई को बधाई दी। उन्होने कहां कि, प्रेमप्रकाशभाई से बहुत कुछ सिखने को मिलता है, इसमें रजनी दीदी और मनिषा दीदी ने चार चांद लगाए। पहले जब बन रहा था तो बड़ा लग रहा था और अभी यह छोटा लगने लगा है। करकरावनहार परमात्मा शिवबाबा है वह करा रहा है। सभी भाई-बहनो ने प्रेमप्रकाश भाई को जन्मदिन की बधाई दी।

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कल से चेक करे कोई हमे उनकी आदत के अनुसार डिस्टर्ब करेंगे तो हम डिस्टर्ब नही होंगे। जनरल एक्सक्पल लेते हुए उन्हाने ने कहा की हम ऐसा सोचते है की वह ऐसा क्यो करते है? रोड पर कचरा फेकने से इरिटेट होते पर हम क्यो अपने मन मे कचरा फेंके। मन साफ रखना है। मोटी मोटी बातो को देख रहे है। पर जीवन की बातो को देखना बाकी है। सबसे पहली डयुटी है अपने मन को डिस्टर्ब नही रखना है। एनर्जी वेस्ट कैसे होती है इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा की कोई गाडी का हाॅर्न बजा रहा है तो हम डिस्टर्ब होते है इसमें एनर्जी वेस्ट होती है। हम मन केा कंट्रोल कर सकते है, हम डिस्टर्ब होंगे तो बच्चो पर क्या असर होगा। जीवन की छोटी छोटी बातो को सॅम्पल के रुप में लेते हुए उन्होंने कहा की लाईफ कैसी होनी चाहिए संयम और सम्मान भरी। मेरा बच्चा टि.व्ही नही देखाता तो खाना नही खाता तो वह कितने दिन नही खाएगा । घर में हम संयम और मर्यादाओं के साथ रहेंगे तो बच्चो में भी वही संस्कार आएंगेे। आज बच्चों को मांगने के पहले ही सब मिल जाता है। पॅरेंट अभी दे रहे है पर क्या जीवन दे सकेंगा।
वही बात बोलनी है पर इरिटेड होकर नही। अपने घर में कल्चर बनता है, कभी कभी हम बात नही करते माना इंमोषनल हेल्थ डिस्टर्ब होता है। सबको पता रहता है 2 दिन यह बात नही करेंगे। उन्होंने बच्चो में संस्कार लाने के लिए घर के वातावरण में स्पिरिच्युअलिटी,पाॅजिटिवीटी होने पर जोर दिया। और घर में हेल्दी वातावरण के लिए राय दी की घर में कुछ भी हो जाए भोजन साथ में करना है।
इगो के बारे में कहा की हर बार मै ही क्या झुकु? इसका उत्तर देते हुए उन्होने कहा की जो हेल्दी होगा वही झुकेंगा। हमे यह नही सोचना चाहिए की पिछले बार मै झुका था,उसके पहले भी मै ही झुका था। इसका अधिक विस्तार करते हुए उन्होने बताया की एक्सरसाईज भी करते है तो झुकना पडता है, पहले दिन दुःखता है। पर वह फिर नाॅरमल हो जाता है। हमारी विषेशता होती है दुसरों को मदत करना । तो यह आपकी विषेशता है, पर मदत करना यह दुसरे की विषेशता नही है पर हम एक्पेस्ट करेंगे तो वह गलत होगा। क्योकी वह क्वालिटी मेरी है उनकी नही है। मेरी विषेशता मेरी है, हम दुसरे से एक्स्पेक्ट नही कर सकते है। यह गलत होता है की हम दुसरे से एक्स्पेक्ट करते हैै। सामनेवाला का संस्कार मेरे संस्कार से अलग है। जब हम एक्पेक्ट करेंगे तो हम डिस्टर्ब होंगे। फेसबुक में भी देखते है की मेरे पोस्ट को लाइक किया? मै भी करुंगा। जब मैने किसी से प्यारे से बात की, मैने किसी से बहुत बहुत प्यार से बात की तो यह मेरी विषेशता है दुसरे ने नही किया तो क्या हुआ! वह बिमार था मै क्यो बिमार हो जाऊ?
हमारे लिए कोई बहुत बुरा करता है क्या हम उनके लिए अच्छा सोच सकते है। मै रांग कर रहा हुॅ माना इमोषनल हेल्थ डाऊन है। कोई गलत करता है तो भी मै प्यार से बोलू तो यह ताकत है पर मै भी गलत करते है तो कमजोरी है, क्षमा करने के लिए ताकत चाहिए, सहन करने के लिए ताकत चाहिए। हो सकता है पुरी दुनिया आपको गलत कहेंगी। पर आप अपने अच्छे संस्कारों पर बने रहेंगे यह इमोषनल हेल्थ है। नई ड्रेस लि और किसने तारीफ की तो इमोषनल हेल्थ है खुषी, नही बोला तो डाऊन। ड्रेस के लिए स्टेबल तो जीवन के लिए स्टेबल। हम अप्रुवल चाहते है लोगो से। यह अपु्रवल के कारण क्या हो रहा है की जिंदगी के बारे में भी अप्रुवल चाहते है।
उन्होने जिंदगी के लिए कहा की डिसीजन लेना पडेंगा, पर हमारे जिवन के लिए हो सकता है थोडे समय के लिए ग्लानी भी होगी। जो सब करते है उनको हम सही मानते है पर यह सही नही की जो सब करे वही सही। तो रोज अपने आप से कहना की मुझे किसी के अप्रुवल की जरुरत नही है। हमे किसी से कुछ भी नही चाहिए। हम सारी चीजे इसी आधार पर कर रहे है लोग क्या कहेंगे। लोग वही कहेंगे जो उनका संस्कार है। दुनिया को एक्पेक्टेषन पुर्ण करना यह मेरा एजंडा नही। जो मुझे अच्छा लगता वही मै करुंगा। मुझे किसीसे अप्रुवल नही चाहिए। मुझे किसी से एप्रिषिएषन नही चाहिए। जो जैसे वैसे मै उनको स्विकार करता हूॅ, वैसे वह भी मुझे स्विकार करेंगे। सबके संस्कार अलग अलग है। किसी को माफ करने का संस्कार है।
इमोषनल हेल्थ सुधारने के लिए 1घंटा देना पडेंगा, मन को रेस्ट मिलेंगा। निंद के बारे में कहा की रात को सोते समय पढ़ा, देखा मन बायब्रेट होगा तो निंद कैसे आएंगी, निंद अच्छी नही आएंगी, रात को मन चलता है। तो यह अपने मर्यादाए बनानी है। अगर 10 बजे सोना है। तो 8.00 बजे के बाद कुछ पढ़ना नही है। एक वर्किंग कल्चर, हॅपी सोसायटी बनानी है, इस टाइम के बाद हम काम नही करेंगेे। हम जो देखते,पढते है वैसे हम बनते है। करके हमे चेक करना है। अगर हमारे फोन पर मॅसेज आ रहे है वह सात्वीक नही तो पढे़ बिना डिलीट करे। जो हम बनना चाहते वही सुनना, पढना है। माय इमोषनल हेल्थ इज माय रिस्पोंसिबिलीटी। माइंड और बाॅडी के लिए 1 घंटा सुबह देना है। वातावरण में वायब्रेषन फैलाते है, आपको डर लगना चालु होगा क्योकी वातावरण में इमोषनल वायब्रेषन फैले है। तीन महिने घर का खाना खाईये। खाने से बहुत सहज तरके से संस्कार परिवर्तन हो सकता है। बाहर जाकर खाया तो पता नही किसने बनाया, किस मन की स्थिती में बनाया, किस वायब्रेषन से बनाया। फिर कहते सुबह तो मुड अच्छा था पर अभी अचानक मेरा मुड चेंज हो गया। ऐसा हुआ तो पहले चेक करे किसने खाना बनाया। इसलिए खाना जो बनाते है उनको डांटना नही। क्योकी रोते रोत खाना बनाया हमे भी दिनभर उदासी होगी। किचन में कोई मंत्र, परमात्मा की याद के गीत, भजन हो। बनाने वाले में मन मे नफरत है तो खाने वाले के मन में भी वही चलेंगा। उन्होंने पालक वर्ग को राय दी अगले महिने परिक्षा है बच्चो को घर का भोजन खिलाओ निडर के वायब्रेषन दो, पाॅवरफुल वायब्रेषन दो। खाना खाते समय टिव्ही नही चलेंगा। जैसा अन्न वैसा मन है। फोन दुर। खाना खाना मन को एनरजाईज करने का समय है। कोई आर्गुमेंट नही करनी है। कोई बिझीनेस की बाते नही करनी है खाना खाते समय। खाने में सात्विकता हो। सोते समय परमात्मा पाॅवर हाऊस से कनेक्ट होकर षक्ति लेना। आप मेडिटेषन करके आए तो घर का इमोषनल हेल्थ दे सकते है। मेरे मन की स्थिती दुसरो पर नही, मेरा व्यवव्हार दुसरो पर डिपेंड नही, कोई बात हो गई कितनी देर में नाॅरमल, मुझे किसी से अप्रुवल नही चाहिए। हम वो करेंगे जो हमारे मर्यादाओ के अंदर रह कर करनी है। मर्यादाए ताकत बढाती है। रावण का एक्झम्पल दिया लकिर को पार किया, मर्यादा को पार किया दुःख। गाॅसिप सुनने के लिए मना करना। जो हम पढते है देखते है उसका ध्यान देना है। हर चिज को अरजंट नही बोलना है। इमोषनल हेल्थ डाऊन नही करना है। क्योकी टाइम है। बोलो हाय एनर्जी वर्ड बोलना है। कल हुआ वो आज नही बोलना, क्योकी जा कल हुआ आज होगा। मेडिटेषन यह कोई आप्षन नही है यह नेसेसिटी है। दीदीने सबको ब्रह्माकुमारीज सेंटर पर 3 दिन का  मेडिटेशन कोर्स का इन्विटेषन दिया। खाना खाने के 10 मिनिट बाद डिस्कषन। बच्चो के पानी में वायब्रेषन पाॅवरफुल सोल, फिअरलेस सोल। स्कुल में भी स्पीरीच्युअल वायब्रेषन फैलाने है। मेडिटेशन करवाया तीन मिनिट का।
ब्रह्माकुमारी मनिशा दीदी ने मंच संचालन किया। और रजनी दीदीने शब्दो के गुलदस्ते दिया। रजनी दीदी ने ज्ञानसरीता और ज्ञानयोग देवी की उपमा। रंजना सुषिल अग्रवाल और निलिमा शिषीर दिवटे ने ब्रह्माकुमारी षिवानी दीदी को गुलदस्ता दिया। विष्वषांतीसरोवर मे 5000 भाई-बहेनो प्रवचन का लाभ लिया।