Vishwa Shanti Sarovar, Nagpur

सुनंदा दीदी, नॅशनल कोआर्डिनेटर, ग्रामविकास विंग। सुनंदा दीदी कई सालो से शाश्वत यौगिक खेती के कार्यक्रम करते है। ब्रह्माकुमारी सुनंदा दीदीजीने ब्रह्माकुमारी संस्था का परिचय दिया की इस संस्था को 84 साल हुए है। इस संस्था का उद्देश बताया की यह संस्था मनुष्य आत्माओं को निगेटिव्ह से पाॅजिटिव्ह, प्युअर, पीसफूल बनाती है। इसमें पहला मुख्य सब्जेक्ट सच्चा ईश्वरीय ज्ञान। इसमें मै कौन हू, मुझे कौनसा कर्म करना जिसमें लाभ हो ना की नुकसान हो। भगवान का सत्य परिचय दिया जाता है। सृष्टी चक्र, दुसरा राजयोग पढाया जाता माना राजाई प्राप्त करानेवाला योग। योग के व्दारा स्वभाव और कर्मो में पाॅजिटिव्हीटी लाता है। तिसरा धारणा, क्षमा, प्रेम, दया इसकी धारणा होती है। चवथा सेवा माना सुख देना, सहयोग देना इसमें तन-मन-धन की सेवा सिखाई जाती है। यहा सिखाया जाता आत्म ज्योत से अपनी और दुसरो की जगानाा इस संस्था पाच पिस प्राइज मिले है। युनो में गैरसरकारी संस्था के रुप में कार्य कर रही है। इसमें 19 विंग है। ग्रामविकास विंग के अंतर्गत गांवो की सेवा करते है। कुछ गांव एडाॅप्ट करते है और सरपंच, पोलीस पाटील वहा के युवा को सम्मिलीत करते हुए काम करते है। दुसरा इसमें व्यसनमुक्ती के कार्यक्रम करते है। इसमें तिसरा शाश्वत यौगिक खेती इसमें चार प्रकार के फायदे होते है। सबसे पहले उनके कर्म श्रेष्ठ कर्म होते है चरित्रवान बनाता है। जमीन उपजाऊ बनती है। और फसल बहुत अच्छी जो बहुत दिनो तक रहती है। इससे पैसा भी ज्यादा मिलता है। चवथा संबध सुधरते है। किसान माना हम समझते है देश की शान है। उनको हम इस विंग के व्दारा शान में बिठाते है। यहा पर कोई भी आ सकता है। धर्म भेद, जाती भेद नही है। क्योंकी इसकी स्थापना स्वयं भगवान ने की है। जब दुनिया में धर्म ग्लानी का समय गीता में वर्णीत यदा यदा ही धर्मस्य ……. के समय अनुसार उनकी जरुरत पूरी दुनिया को पडी तो वह 1937 में अवतरीत होकर इस संस्था की स्थापना की।
ब्रह्माकुमार भ्राता राजेश दवे जी, उपमहाप्रबंधक, नाबार्ड ने कहा यह सही बात है की हम ऐसे समय पर खडे है जहा जीवनशैली परिवर्तीत हो रही है। हम यब को मिल कर ऐसा कर्तव्य करना जिससे विश्व की गरीमा फिर से स्थापित कर सके। अभी भी हमारी 55-60ः भाई-बहने गावों में रहते है। गावो के लोगों के प्रती कैसे संवेदनशील बने कैसे योगदान दे। योग का दान देना जरुरी है। पहले अपने आप को श्रेष्ठ समझे। भारत मेरा देश है। भारत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ देश है। जीवन एक यात्रा है। अभी सारा विश्व सोच रहा है अभी कौन आगेे आयेंगा तो जो देश अपना हाथ, हेड और अध्यात्मिकता(दिल) उपयोग में लाएंगे वह आगे जाएंगे और वह भारत ही होगा। सायन्स और टेक्नाॅलाॅजी के साथ मिसिंग लिंक है तो वह हैै अध्यात्म की लिंक। वह पूरी कर रही है ब्रह्माकुमारीज। प्रकृती और मानव इन दोनों का बहुत अच्छा संबंध है। सुक्ष्म जीवाणू हमारी बहुत मदत करते है। धरती माता सुखी तब है जब सुक्ष्म जीवाणू बहुत ज्यादा होते है। गाय के गोबर में सबसे ज्यादा सुक्ष्म जीवाणू है। अमूल कहता है अमूल टेस्ट आॅफ इंडिया है पर भारत टेस्ट आॅफ वल्र्ड है। अमेरिका में चले जाओ भारत के बैंगन का टेस्ट वहा नही मिलता। भारत के नॅशनल फ्लॅग में तीन कलर है। ग्रीन कलर ग्रीन रिव्हाल्युशन का प्रतीक है। व्हाइट कलर श्वेत क्रांती का प्रतीक है और आॅरेंज कलर अध्यात्मिकता से सच्ची दिशा और सच्चा परिवर्तन का प्रतीक है। अभी तक हम प्रकृती का दोहन और शोषन करते रहे। हमारे सोच से प्रकंपन फैलते है उसका पेड और पौधो पर असर होता है। उसके लिए खेती में सुक्ष्म वातावरण बनाना जरुरी है। योग के माध्यम से परिवर्तन कर सकते है। उन्होंने शाश्वत यौगिक खेती का कन्सेप्ट बताया कि जीयो और जीने दो। ग्रामविकास में अध्यात्मिकता की जरुरत है। कृषी में हमें सभी जीवो को शांती के सुख के शक्ती देना। आध्यात्मिकता से हम जमीन को सस्टेनेबल माना शाश्वत बनाता है। 18 एलिमेंट जो धरती को उबजाऊ बनाते है। जो की मिसींग है, जो सुक्ष्म है उनको जमीन को देना है। आज गाव में राजनेता है पर नैतिकता है यह मिसिंग लिंक है। गाव में स्कुल है पर चरित्र की मिसिंग लिंक है तो उस मिसिंग लिंक को पूर्ण करना है। यह समय हैै परिवर्तन का हमे अपनी उंगली लगाना हैै गोवर्धन पर्वत रुपी इस व्यवस्था में, यह सृष्टी यह देश को सहयोग देना है। आधुनिकता के साथ अध्यात्मिकता को जोडना है। धन के साथ अध्यात्मिकता को जोडना है। ब्रह्माकुमारीज संस्था इस कार्य में अहम भुमिका निभाएंगी और भारत को टाॅप बनाएंगी। हम प्रकृती को शंाती प्रदान करेंगे तो प्रकृती भी हमें शांती देंगी। सायंन्स के साथ सायलेन्स पाॅवर को अपनाए।
ब्रह्माकुमार राजयोगी भ्राता राजूभाई उपाध्यक्ष ग्रामविकास प्रगाग जी ने कहा की भारत के किसान को अन्नदाता कहते है। उनके मेहनत के कारण हम जी रहे है। वह किसान हमारे लिए दिन रात मेहनत कर रहा है। लेकिन न्युज पेपर में देखे तो पता चलता है की किसान आत्महत्या कर रहा है। और विदर्भ में इसका प्रमाण ज्यादा है। इसके लिए कई प्रकार की योजनाए बनाई गयी है। यौगिक खेती महाराष्ट्र की देन है। एक भाई ने यह यौगिक खेती चालू की थी पर तब मुझे इसके बारे में कुछ भी नही पता था वह मुझे उनके खेत पर लेकर गए और वहा देखा तो बहुत अच्छे पेड थे खेती लहरा रही थी गोमुत्र और गोबर का खत देते है और उसके साथ परमात्मा से शक्तिया लेकर पौधो को दान देते है। ऐसेही 2-3 बार वहा जाना हुआ और इस प्रोजेक्ट का निर्माण हुआ। जैसा ‘अन्न वैसा मन’ ऐसा कहते है। इस खेती में रसायण का और केमिकल का उपयोग नही होता। पहले तो गुजरात में एस. डी. एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी धातेवाडा में इसका सायंटिफिक रिसर्च हुआ और पाच साल रिसर्च किया गया। और बाद में गुजरात के चारो युनिवर्सिटी में रिसर्च किया गया और सफल रहा। महाराष्ट्र की युनिवर्सिटीज में भी रिसर्च हुयी।
सारे रोगो की जड है खाद्य पदार्थ, पंजाब में अनाज उगता है पर वह बाहर से बुलाते है पर वह वह बाहर से बुलाते है। पर आबादी भी दिनोदिन बढ रही है। सरकार व्दारायोजनाए बन रही है की किसानो की आमदनी दुगुनी हो जाए। जगन्नाथ पूरी के मिटींग में कमिश्नर ने बताया था की 2000 रु. हर किसानो को मिला पर उस दिन शराब की बिक्री दोगुनी हुर्यी वह पैसा शराब पिने में चला गया। किसान को पैसा आया पर चिंतन और चरित्र को परिवर्तन नही किया। ब्रह्माकुमारीज संस्था मुख्य उद्देश यह है की हमारे विचारधारा को परिवर्तन कर चिंतन और चरित्र निर्माण करना। विचारों के आधार से हमारे चारो और एक सकारात्मक आभा मंडल तैयार होता है। इसका प्रयोग कर सकते हैै। घर में भी गमलो में पौधे लगाओ और उनसे बाते करो रोज और कुछ दिन मत जाओ तो सुख जाएंगे तो सुख जाएंगे। तो पौधे भी राह देखते है मालिक का। तो मै आत्मा इस शरीर का मालिक हु। किसान भाई बहुत खुशी से बताते है जहा हम योग करते हैै जहा हम योग में चक्कर लगाते है वहा ओले भी गिरते तो भी हमारे खेतो में कोई नुकसान नही होता। जैसा अन्न वैसा मन तो झगडों का कारण बिमारीयों का कारण यह अन्न है। 12000 पेशंट के पिछे 1 डाॅक्टर है। तो बिमारीया भी बहुत बढ रही है। परमात्म शक्ति का उपयोग कर खेती करना है इसके कई गुणा अच्छे परिणाम आएंगे। किसी भी प्राॅब्लम का निवारण प्रकृती में ही है बस हमे उसको अच्छे से युज करना है। हम किसी भी प्रकार का रसायण का युज नही कर रहे है। सिर्फ पशु धन गोबर का युज करना है और उनपर योग का प्रयोग करना है। यह योग आपको 7 दिन के कोर्स में पूरी तरह से सिखाया जाएंगा। संसार के सभी समस्याओं का निवारण इस योग मे है। मन के प्राॅब्लम भी इस योग में खत्म हो जाएंगे।
बहन भाग्यश्री बानायत, संचालक रेशिम संचालनालय, महाराष्ट्र ने कहा की रेशिम खेती में भी केमिकल वा रसायण का यूज नही होता है। शाश्वत यौगिक खेती में किसी केमीकल का युज नही होतो तो जमीन को भी नुकसान नही होता. यह खेती डबल उत्पन्न का वादा करती है। उन्होने ब्रह्माकुमारीज संस्था की सराहना की वह किसानो के लिए आगे आए। हमारे पुरातन काल से ही यौगिक खेती का प्रयोग होता था पर भूल गए थे ब्रह्माकुमारीज ने इसे फिरसे दुनिया के सामने लाया है। बहन रश्मि बर्वे जिल्हा परिषद अध्यक्ष जीने कहा की आज किसान आत्महत्या कर रहा है और यौगिक खेती से समस्या समाप्त हो जाएंगी इसके लिए ब्रह्माकुमारीज का अभिनंदन किया।
भ्राता रविंद्र भोसले, जाॅइन्ट डायरेक्टर, कृषी विभाग, नागपूर जी ने कहा की कोई भी कृषी तकनीक और ज्ञान किसानो को देना है तो उसे कृषी विद्यालय में प्रमाणित होना चाहिए। जनसंख्या बढी और हरित क्रांती हुई पर उसमे खत और रसायन का युज किया गया हमारे संकल्प खराब हुए। आज हर एक आदमी कहता है पर्यावरण की हानी हो रही है। पर मुझे कोई पुछेंगा की यौगिक खेती से फायदा होगा तो मै कहूॅंगा की हाॅं. प्रकृती से जुडना पडेंगा उसमें जैविक खेती करना पडेगा। और बिमारीयो को खत्म करने के लिए यौगिक खेती का युज किया जाना चाहिए। परमपरागत खेती में हमे यौगिक खेती और जैविक खेती को लाना पडे़गा। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार का किसानो के लिए एक प्रोजेक्ट चल रहा है जिसका नाम है स्मार्ट(स्टेट आॅफ महाराष्ट्र आर्ट एन्ड रुरल ट्रेनिंग प्रोग्राम उसके साथ यौगिक खेती को जोड दिया जाए तो सबको उससे लाभ होगा। उन्होंने महासम्मेलन को धन्यवाद दिया।
भ्राता टेकचंद सावरकरजी जी ने कहा की यह बात है की किसान अभी भटक गया है। उन्होनें कहा पुराने लोगो ने खेती की और सुखी थे गाय रहती थी गोबर डालता था। अभी हम पानी डालने के बाद पाव अंदर नही जाता क्योकी रसायण का युज किया। टमाटर किसान बेचने जाता तो पेस्टीसाइड फवारनी करके जाते क्योंकी पैसा निकालना है। आज हम फल खाने में भी हिचकिचा रहे है। हमारे खेत में नाला था अभि नाली बना डाली. बारीश आती तो बाढ आ जाती है। अभी विदेशो में जाकर बेचने जाओ तो कोई लेता नही इसके कारण अभी किसानो की जान गले तक आ गयी। अभी हमें यौगिक खेती के बगैर कोई मार्ग नही। सबको शुभेच्छा दी। हमारे देश का नाम पूरे पूरी दुनिया में होगा।
ब्रह्माकुमारी राजयोगीनी सरला दीदी ने कहा भारत में किसान भाईयो को बहुत परेशानीया हो रही है। परेशानीयों को दूर करने के लिए पहले स्वयं को जानना होगा और उस सर्वोच्च सत्ता से जुडना पड़ेगा। संतुलित मन हमेशा श्रेष्ठ कर्म करता है। वह शुध्द मन ही सब चेंज कर देगा। इस विद्यालय में यही बताया जाता है की स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन होगा। रोज आधा घंटा अपने लिए, समाज के लिए, देश के लिए आधा घंटा देना होगा। एक दिप से दिपमाला बनती है। किसानो की आत्महत्या हम रोक सकेंगे। परमात्मा पिता से शक्तियों से भरपूर होते रहिये।
भ्राता बाळासाहेब रुग्वे जी प्रथम यौगिक खेती करनेवालो में ने कहा की मै 18 साल पहले सायंन्स का विद्यार्थी था। मेरे पास 11 एकर खेती थी और उसमें से आधा एकर जमीन ब्रह्माकुमारीज को प्रयोग करने के लिए दिया। और कुछ समय बाद मैने कमाल देखी लहराती हुई। सबसे पहले हमारी धरती माॅं को हमें परमात्मा की याद में शांती के वायब्रेशन देते है। आइस्टाईन ने कहा तो अध्यात्म और विज्ञान को मिलाना पडे़गा। एक साइंटिस्ट ने कहा की ब्रह्मांड की एनर्जी को युज करो। बीज को योग के वायब्रेशन देकर टेस्ट किया तो पाया गया की वायब्रेशन दि गए बीज के जर्मिनेशन पाॅवर 94ः पाया गया और नाॅर्मल सीड में 86ःपाया गया। अनाज के क्वाॅलिटी को बढाना हो तो यौगिक खेती करनी पडेगी।

श्री सुनिल बाबू केदार जी पशुपालन तथा क्रिडा विभाग कॅबीनेट मंत्रीने कहा की मै 25 साल से इस संस्था से जुडा हूॅ। मै सम्मिलित रहता हूॅ। इय संस्था व्दारा अनोखे प्रोग्राम चलाए जाते है। जो इंसान के जिंदगी में सुधार लाने के लिए बहुत जरुरी है। मै मानता हू की सब कार्यक्रम लोगो के हित के लिए करते है। मै किसान होने के नाते मै इस संस्था का शुक्रगुजार हॅू कि संस्था लोगो के सामने प्रक्टिकल योजना बता रही है। इस संस्था के कार्यक्रम अपने मुकाम तक पहूचते है। आज लोगो को जरुरत है यौगिक खेती की। उनको परमात्मा का स्मृती चिन्ह फोटो भेट दिया गया। किसान की समस्याओमें सरकार की योजनाओ मे यौगिक खेती के बारे में सोचा जाएगा। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज को आव्हान किया की महिलाओं की उत्थान के लिए कार्यक्रम आयोजीत करे।
भ्राता मुनिष शर्मा जी डायरेक्टर साॅईल कन्जरवेशन आॅफ इंडिया ने कहा की ब्रह्माकुमारीज का बहुत ही सराहनिय कार्य हुआ है। जो किसान हाशीये पर चले गए थे उनके तरफ ध्यान दिलाया। सिक्किम पूरी तरफ आॅरगनिक है। उन्होने खुद के डिपार्टमेट के कार्याे मे ब्रह्माकुमारीज को आमंत्रित किया। डाॅ. उन्होने कहा की खेती भगवान के हिसाब से होनी चाहिए। ब्रह्माकुमारीज से मेरा पुराना संबंध रहा है। उन्होंने मेडिटेशन की तरफ सबका ध्यान खिचवाया। मेडिटेशन के लिए उन्होंने सुबह का टाइम अच्छा बताया।
राजयोगीनी ब्रह्माकुमारी रुक्मिनी दीदी ने कहा की हमारा मनोबल कमजोर हो गया है उसके कारण प्रकृती पर भी इसका असर होता है। और उन्होंने राजयोग करवाया। सबको शांती का अनुभव हुआ। राजयोगी ब्रह्माकुमार प्रेमप्रकाश भाई जी ने आभार प्रदर्शन किया। मंच का संचालन ब्रह्माकुमारी शोभा बहेनजी ने किया और सभी उपस्थिती भाई-बहनो को ब्रह्मा-भोजन करा कर बिदाई दी।